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चल-चरखा

चल-चरखा (हथकरघा प्रशिक्षण व उत्पादन केंद्र)

अतीत काल से ही भारत अपने वस्त्र निर्माण कला के कारण विश्व का सबसे बड़ा वस्त्र उत्पादन केंद्र रहा है, परंतु मशीनीकरण के इस दौर में हमने हस्तशिल्प को बहुत ठेस पहुंचाई है। परिणाम स्वरुप भारत की आत्मा कहलाने वाले ग्रामीण क्षेत्र आज बेरोजगारी, गरीबी और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
 
ऐसी अनेक समस्याओं के समाधान हेतु परमपूज्य आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से भारत भर में 100 से अधिक हथकरघा प्रशिक्षण व उत्पादन केंद्र संचालित हो रहे हैं।

अहिंसक व सात्विक वस्तुओं के उत्पादन हेतु कताई-बुनाई प्रशिक्षण के उद्देश्य से चल-चरखा महिला हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र प्रतिभास्थली में भी संचालित हो रहा है।
 
यहाँ वर्तमान में लगभग 65 महिलाएँ प्रशिक्षण व उत्पादन का कार्य कर रही है। यहाँ से 40 से अधिक महिलाएँ प्रशिक्षण प्राप्त कर, अपना स्वयं का प्रशिक्षण व उत्पादन केंद्र संचालित कर रही हैं। ये सम्पूर्ण केंद्र महिलाओं द्वारा, महिलाओं के लिए संचालित हो रहे हैं।

भविष्य में भी इसी प्रकार के अन्य केंद्रों की स्थापना के लिए न्यास संकल्पित है। प्रतिभास्थली चल-चरखा प्रशिक्षण केंद्र बेरोजगार महिलाओं को सशक्त व सुदृढ़ रोजगार देकर उन्हें सुरक्षित भविष्य प्रदान करता है।
 
 
 
 

 

हारे को बना सहारा - हथकरघा

 
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर पिंडरुखी गाँव में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से प्रतिभामंडल की बहनों द्वारा हथकरघा रोजगार प्रकल्प का शुभारंभ किया गया।

जिसमें ब्रह्मचारी बहनों द्वारा गाँव की बेरोजगार महिलाओं को हथकरघा से वस्त्र बनाना सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया।